Monday, September 12, 2016

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adsense क्या है और इसमें account कैसे बनाये

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Thursday, September 8, 2016

 

 google me email id kaise banaye 

google mail  बनाना -


email id kaise banaye

दोस्तों क्या आप internet use करते है और आपके पास gmail id नहीं है तो यह बात अच्छी नहीं है क्योकि इन्टनेट use करने वालो के पास gmail का होना जरुरी है जिसके जरिया आप किसी को भी E-mail , youtube में अपना video शेयर करना, blog बनाना , website बनाना , online पैसा कमाना आदि चीजे कर सकते है .
तो चलिए हम आपको gmail में अकाउंट बनाने के बारे में बताते है जिसके जरिये आप भी आप अपना खुद का E-mail प्राप्त  कर पाएंगे और दुनिया से जुड़े रहेंगे .

gmail से अकाउंट कैसे बनाये


 दोस्तों gmail google  की ही कम्पनी है जिससे google mail भी कहा जाता है .

आप gmail में अकाउंट बनाने के लिए मेरे बताये स्टेप को follow कर
1.      सबसे पहले आप gmail.com पर जाये 


gmail कैसे बनाये

1.      create an account पर click करे
 2. अब आपके पास एक form खुल जायेगा उसमे आप सही सही अपना बारे में भरे .
     "याद रहे कोई गलत जानकारी न देवे क्योकि अगर भविष्य में आप अपना पासवर्ड भूल जाते है तो आपका सही जानकारी ही मदद करेगा . तो सही जानकारी ही भरे"

जीमेल बनाने का तरीका

4.      अब पूरी डिटेल भरने के बाद Next Step पर click करे
      "-अब आपको मोबाइल वेरिफिकेशन के लिए बोला जायेगा . याद रहे आप वही नंबर use करे जो ऊपर अपने gmail create करते वक्त दिया था."

5. मोबाइल वेरिफिकेशन के लिए 2 option आयेगा (A) sms (B) call दोनों में एक को select करे . आप sms ही select करे यह better है.

google में email कैसे बनाये

अब आपके पास एक sms आयेगा वह मोबाइल वेरिफिकेशन का पासवर्ड है उस नंबर को डाले

6. code को डालने के बाद verify पर click करे  

7. अब आपको एक नया windows खुलेगा
जिसपर पूछा जायेगा की क्या आप अपना प्रोफाइल सेट करना चाहते है लेकिन अभी हम gmail बनाने पर ध्यान दे रहे है तो इसको आप रहने दे आप no thanks पर click करके आगे बाद जाये

gmail account login हो गया है 


अब आप नए है इसकारण google आपको स्वागत sms करेगा
यह पोस्ट भी पड़े google adsense kya hai or adsense me account kaise banaye

दोस्तों अगर यह पोस्ट अच्छा लगा तो कृपया share जरुर करे ताकि किसी और की मदद हो सके 

google में email id कैसे बनाये हिंदी में जाने

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Monday, June 20, 2016


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Sunday, February 21, 2016

कटिचक्रासन योग

कटि का अर्थ कमर अर्थात कमर का चक्रासन। उक्त आसन में दोनों भुजाओं, गर्दन तथा कमर का व्यायाम होता है इसीलिए इसे कटि चक्रासन कहते हैं। इस आसन के और भी कई नाम हैं। यह आसन खड़े होकर किया जाता है। 
विधि : पहले सावधान की मुद्रा में खड़े हो जाएँ। फिर दोनों पैरों में लगभग एक फीट की दूरी रखकर खड़े हो जाएँ। फिर दोनों हाथों को कन्धों के समानान्तर फैलाते हुए हथेलियाँ भूमि की ओर रखें। फिर बायाँ हाथ सामने से घुमाते हुए दाएँ कंधे पर रखें। फिर दायाँ हाथ मोड़कर पीठ के पीछे ले जाकर कमर पर रखिए। ध्यान रखें की कमर वाले हाथ की हथेली ऊपर ही रहे। अब गर्दन को दाएँ कंधे की ओर घुमाते हुए पीछे ले जाएँ। कुछ देर इ‍सी स्थिति में रहें। फिर गर्दन को सामने लाते हुए क्रमश: हाथों को कंधे के समानान्तर रखते हुए अब इसी क्रिया को दाएँ ओर से करने के पश्चात बाएँ ओर से कीजिए। इस प्रकार इसके एक-एक ओर से 5-5 चक्र करें। सावधानी : कमर या गर्दन में अत्यधिक दर्द की स्थिति में यह आसन न करें या करने के पहले योग विशेषज्ञ के साथ ही डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें। लाभ : यह कमर, पेट, कुल्हे, मेरुदंड तथा जंघाओं को सुधारता है। इससे गर्दन और कमर में लाभ मिलता है। यह आसन गर्दन को सुडोल बनाकर कमर की चर्बी घटाता है। शारीरिक थकावट तथा मानसिक तनाव दूर करता है।

कटिचक्रासन योग करने के तरीके

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शीर्षासन योगा

सिर के बल किए जाने की वजह से इसे शीर्षासन कहते हैं।

विधि : दोनों घुटने जमीन पर टिकाते हुए फिर हाथों की कोहनियाँ जमीन पर टिकाएँ। फिर हाथों की अँगुलियों को आपस में मिलाकर ग्रिप बनाएँ, तब सिर को ग्रिप बनी हथेलियों के पास भूमि पर टिका दें। ‍इससे सिर को सहारा मिलेगा।

‍फिर घुटने को जमीन से उपर उठाकर पैरों को लंबा कर दें। फिर धीरे-धीरे पंजे टिके दोनों पैरों को पंजों के बल चलते हुए शरीर के करीब अर्थात माथे के नजदीक ले आते हैं और फिर पैरों को घुटनों से मोड़ते हुए उन्हें धीरे से ऊपर उठाते हुए सीधा कर देते हैं तथा पूर्ण रूप से सिर के बल शरीर को टिका लेते हैं।

कुछ देर इसी अवस्था में रहने के बाद पुन: उसी अवस्था में आने के लिए पहले पैर घुटने से मोड़ते हुए धीरे-धीरे घुटनों को पेट की तरफ लाते हुए पंजों को भूमि पर रख देते हैं। फिर माथे को भूमि पर टिकाकार कुछ देर इसी स्थिति में रहने के बाद सिर को भूमि से उठाते हुए वज्रासन में बैठकर पूर्व स्थिति में आ जाए।

सावधानी : प्रारम्भ में यह आसन दीवार के सहारे टिक कर ही करें और वह भी योगाचार्य की देख-रेख में। सिर को भूमि से टिकाते समय ध्यान रखें की अच्छी तरह सिर का वह भाग ही टिका है, जिससे गर्दन और रीढ़ की हड्डी सीधी रह सकें। पैरों को झटके से ऊपर ना उठाएँ। अभ्यास से यह स्वतः ऊपर उठने लगता है।

पुन: सामान्य स्थिति में आने के लिए झटके से पैरों को भूमि पर न रखें तथा सिर एकदम से उपर न उठाएँ। पैरों को क्रमश: ही भूमि पर रखें और सिर को हाथों के पंजों के बीच में कुछ देरी तक रखने के बाद ही वज्रासन में आएँ। जिन्हें सिर, मेरुदंड, पेट आदि में कोई शिकायत हो वह यह आसन कतई न करें।

लाभ : इससे पाचनतंत्र को लाभ मिलता है। इससे मस्तिष्क का रक्त संचार बढ़ता है, जिससे की स्मरण शक्ति पुष्ट होती है। हिस्टिरिया एवं अंडकोष वृद्धि, हर्निया, कब्ज आदि रोगों को दूर करता है। असमय बालों का झड़ना एवं सफेद होना दूर करता है।

शीर्षासन योगा करने के तरीके

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लाभदायक योगा स्टेप


यह कुछ आसनों का क्रम है। इसे क्रम से करने से सभी तरह के रोगों में लाभ पाया जा सकता है। जिन्हें अपनी बॉडी को फिट रखकर सेहतमंड बने रहना है वह इन आसनों को क्रम से नियमित करते रहेंगे तो हमेशा तरोजाता बने रहेंगे।
स्टेप 1- नमस्कार मुद्रा करते हुए नटराजासन, एकपाद आसन, कटि चक्रासन, उत्कटासन करने के बाद पुन: नमस्कार मुद्रा में लौटकर, चंद्रासन, अर्ध उत्तनासन और फिर पादस्तासन करते हुए पुन: चंद्रासन करके नमस्कार की मुद्रा में लौट आएँ।
स्टेप 2- नमस्कार मुद्रा के बाद अर्ध उत्तनासन और फिर दाएँ पैर को पीछे ले जाकर हनुमान करें फिर अधोमुख श्‍वानासन करते हुए बाएँ पैर को आगे रखते हुए पुन: हनुमानासन करते हुए विरभद्रासन-1 करें। फिर प्रसारिता पादोत्तनासन करें। प्रसारिता पादोत्तनासन के बाद फिर कोहनी को घुटने पर टिकाते हुए उत्थिष्ठ पार्श्वकोणासन करें।
स्टेप 3- उत्थिष्ठ पार्श्वकोणासन के बाद फिर पुन: हनुमानासन करते हुए अधोमुख श्वानासन करें। अब दाएँ पैर को सामने रखते हुए पुन: हनुमान आसन करते हुए विरभद्रासन-1 करें। विरभद्रासन के बाद फिर प्रसारिता पादोत्तनासन करें। फिर कोहनी को घुटने पर टिकाते हुए उत्थिष्ठ पार्श्वकोणासन करें।
स्टेप 4- उत्थिष्ठ पार्श्वकोणासन के बाद पुन: हनुमान आसन में लौटकर अधोमुख श्‍वानासन में आकर मार्जायासन और फिर बिटिलियासन करें।
स्टेप 5- बिटिलियासन के बाद, वज्रासन में बैठ जाएँ। वज्रससन में बैठकर योग मुद्रा, उष्ट्रासन, भारद्वाजासन, आंजेनेय आसन, दंडासन, बंधकोणासक, वक्रासन, पवन मुक्तासन और नौकासन करें।
स्टेप 6- नौकासन के बाद पुन: नमस्कार मुद्रा में लौट आएँ और फिर चतुरंग दंडासन, भुजंगआसन, धनुरासन करते हुए मकरासन में लेट जाएँ।
स्टेप 7- मकरासन के बाद शवासन करते हुए पादअँगुष्‍ठासन, विपरितकर्णी आसन, आनंद बालासन, हलासन, पवन मुक्तासन, सेतुबंध आसन, मत्स्यासन करते हुए पुन: शवासन में लौट आएँ। शवासन में कुछ देर आराम करने के बाद उठ जाएँ।
कुल आसन : 36अवधि : 30 मिनट
(A). खड़े होकर: 1.नटराजासन, 2.एकपाद आसन, 3.कटि चक्रासन 4.उत्कटासन 5.चंद्रासन, 6.अर्ध उत्तनासन, 7.पादहस्तासन 8.हनुमान आसन 9.अधोमुख श्‍वानासन 10.विरभद्रासन 11.प्रसारिता पादोत्तनासन 12.उत्थिष्ठ पार्श्वकोणासन।
(B). बैठकर: 1.मार्जायासन 2.बिटिलियासन 3.वज्रासन 4.योग मुद्रा, 5.उष्ट्रासन 6.भारद्वाजासन 7.आंजेनेय आसन, 8.दंडासन, 9.बंधकोणासक 10.वक्रासन 11.पवन मुक्तासन 12.नौकासन।
(C). लेटकर: 1. चतुरंग दंडासन 2.भुजंगआसन 3.धनुरासन 4.मकरासन 5.शवासन 6.पादअँगुष्‍ठासन, 7.विपरितकर्णी आसन, 8.आनंद बालासन, 9.हलासन 10.सेतुबंध आसन 11.मत्स्यासन 12.शवासन।

लाभदायक योगा करने के तरीके

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Friday, February 19, 2016

पद्मासन योग

आसन परिचय : संस्कृत शब्द पद्म का अर्थ होता है कमल। इसीलिए पद्मासन को कमलासन भी कहते हैं। ध्यान मुद्रा के लिए यह आसन महत्वपूर्ण है।

आसन लाभ : पद्‍मासन से पैरों का रक्त-संचार कम हो जाता है और अतिरिक्त रक्त अन्य अंगों की ओर संचारित होने लगता है जिससे उनमें क्रियाशीलता बढ़ती है। यह तनाव हटाकर चित्त को एकाग्र कर सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है। छाती और पैर मजबूत बनते हैं। वीर्य रक्षा में भी मदद मिलती है। नियमित अभ्यास से पेट कभी बाहर नहीं निकलता।


आसन विधि :
स्टेप 1- दोनों पैरों को सीधा कर दंडासन की स्‍थिति में भूमि पर बैठ जाइए।
स्टेप 2- दाहिने पैर के अंगुठे को बाएं हाथ से पकड़कर घुटने मोड़ते हुए दाहिने पैर के पंजे को बाईं जांघ के मूल पर रखिए।
स्टेप 3- बाएं पैर के अंगुठे को दाहिने हाथ से पकड़कर घुटने मोड़ते हुए बाएं पैर के पंजे को दाहिनी जांघ पर के मूल पर रखिए।
स्टेप 4- दोनों घुटने भूमि पर टिकें हो और पैर के तलवे आकाश की ओर। रीढ़, गला व सिर सीधी रेखा में रखिए।
स्टेप 5- हथेलियों को घुटनों पर रखिए या एक हथेली को दूसरी पर रखकर गोद में रखिए। आंखें बंद कर सांसों को गहरा खींचते हुए सामान्य गति कर लें।
स्टेप 6- आसन से वापस लौटने के लिए पहले बाएं पैर के पंजे को दाहिने हाथ से पकड़कर लंबा कर दें। फिर दाहिने पैर के पंजे को बाएं हाथ से पकड़कर लंबा कर दें और पुन: दंडासन की स्‍थिति में आ जाए। यह एक ओर से किया गया आसन है अब आप पहिले बाएं पैर को जंघा पर रखकर इसे आस को करें।

अवधि/ दोहराव : प्रारंभ में यह आसन 30 सेकंड के लिए करना चाहिए फिर सुविधानुसार समय को बढ़ाया जा सकता है। इस आसन में पारंगत होने के लिए दो से तीन बार करना चाहिए।

सावधानी : पैरों में किसी भी प्रकार का अत्यधिक कष्ट हो तो यह आसन न करें। साइटिका अथवा रीढ़ के निचले भाग के आसपास किसी प्रकार का दर्द हो या घुटने की गंभीर बीमारी में इसका अभ्यास न करें।

पद्मासन करने के तरीके

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